मैं साँवली हु , अद्वितीय और सुंदर हु – समाज मेरे रंग-रूप पे टिप्पणी करना छोड़ दे

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मेरा जन्म एक मध्यम वर्ग, रूढ़िवादी संयुक्त परिवार में हुआ था और मैं अपने माता-पिता की पहली औलाद थी और परिवार में चौथी लड़की थी।

जो कहानी मै बताना चाहती हु वह यहाँ से शुरू होती हैं –

बचपन से मुझे लोगों ने बताना शुरू कर दिया थी के मैं साँवली और घुंघराले बालों वाली बदसूरत लड़की हु। मुझे चौथी या पाँचवी कक्षा से ही यह बताया जा रहा था कि मुझे अपनी त्वचा ‘ठीक’ करने के लिए सर्जरी करने की आवश्यकता है। शायद इन्हीं कारणों ने मुझे एकाकी, गुस्सेल, और ज़िद्दी लड़की बना दिया था। मैं खुद से और अपने से संबंधित हर चीज़ से नफरत करने लगी थी। मेने अपना आत्मविश्वास खो  दिया था।

सिर्फ़ इतना ही नहीं मैंने एसे भी चीज़ें सुनी है जैसे, “तुम जितने भी स्टाइलिश या अच्छे कपड़े पहन लो, तुम दिखनी तो बदसूरत और काली ही हो।” मुझे कभी एहसास ही नहीं हुआ कि मुझमें कुछ अच्छी बातें और गुण भी है। इन गुणवत्ताओ को परखने वाला और कोई नहीं पर, मेरे  पति थे। हमारी शादी पिछले साल हुई परंतु हम एक दूसरे को कॉलेज के वक़्त से, एक दूसरे को जानते है।

हमारे रिलेशनशिप को दस साल हो चुके थे जब हमारी शादी हुई। वह एक बहुत ही शांत और संयम स्वभाव के व्यक्ति है और मैं उनकी पूरी तरह से विपरीत व्यक्ति हु। मुझे अभी भी कभी कई बार आश्चर्य होता है कि वह मुझसे प्यार कब और कैसे करने लगे।

वह एकमात्र व्यक्ति है जिन्होंने मुझे महसूस करवाया की मैं बदसूरत नहीं परंतु अलग हु और जब की मैं अलग हूं, सुंदर हूं और अद्वितीय हूं। उन्होंने मुझे एहसास दिलाया कि मेरे पास बहुत सी चीजें हैं जो सराहना करने लायक है और इसी वजह से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा, मैंने खुद को एक निडर, घुंघराले बालों वाली, घर के बहार निकल कर अपने सपनों को हासिल करने वाली बिंदास और सीधी सरल लड़की के रूप में स्वीकार कर लिया।

अगर अब कोई मेरे दिखावे पे टिप्पणी करता है तो मैं उन्हें मुहफट होके जवाब दे देती हु की, यदि अगर आपको मेरी त्वचा का रंग या दिखावे से इतनी तकलीफ़ हो रही है तो आपको एक मानसिक चिकित्सक के पास अपनी बीमारी का इलाज करवानी की ज़रूरत है। मुझे जो मिला है में उससे पूरी तरह से संतुष्ट हु और मुझे अपने पे और अपनी ख़ूबसूरती पे गर्व है।

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“आप एक लड़की हैं और आप यह नहीं कह सकते हैं या ऐसा नहीं कर सकते हैं।” ऐसी सलाह को और उसे देने वालों को मैंने नज़रअंदाज़ करना सीख लिया है। मैं लोगों की आलोचनाओं का जवाब अपनी मर्ज़ी के कपड़े एवं गहने पहन कर, करती हु।

कुछ महीनों पहले मैंने “इनारा” नामक गहेनो का एक व्यवसाय शुरू किया और मुझे खुशी है कि यह धीरे धीरे बढ़ रहा है।

मैं अभी भी अपने गृहनगर में अपनी पीएचडी (PhD) पूरी करने का प्रयत्न कर रही हु जिस समय मेरे पति दिल्ली में है। जब मेरी शादी हुई, तब लोगों ने मुझे अपनी पीएचडी छोड़ने के लिए जोर किया था क्योंकि एक विवाहित औरत को अपने पति के साथ ही रहना चाहिए। लेकिन मेरे पति इस मामले में बहुत सहायक रहे हैं। वह मेरे साथ एक चट्टान की तरह खड़े है; वह हमेशा मेरे साथ खड़े रहे है।

वह मेरी ताकत है और उन्होंने ही मुझे ख़ुद से प्यार करना सिखाया है।

हम सभी अपने जीवन जीने या सिर्फ हमारे सपनों को प्राप्त करने के लिए हमारे दैनिक संघर्ष कर रहे हैं। तो मुस्कुराते रहो, आगे बढ़ते रहो, बहादुर रहो!

 

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