इन खाद्य पदार्थ और आदतों से पीरियड्स (मासिक) के वक़्त दर्द बढ़ सकता हैं

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हर महिने हम लड़कियों और औरतों को मासिक (पीरियड्स) का सामना करना पड़ता हैं। कुछ औरतों के लिए पीरियड्स के दिन बाकी दिन के समान ही होते हैं।  परंतु कुछ औरतों के लिए पीरियड्स के दिन आसान नहीं होते क्यों की उन्हें पीरियड्स से जुड़े दर्द और दूसरे कई शारीरिक बदलावों का सामना करना पड़ता है।

क्या आपने पीएमएस (PMS) के बारे में सुना हैं ? पीएमएस (PMS) मतलब प्रेमेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम (Pre-Menstrual Syndrome).  यह एक ऐसी शारीरिक स्तिथि हैं जो पीरियड्स के पहले औरतों में देखी जाती है।

मासिक आने से पहले या मासिक के वक़्त पेट या पीठमें दर्द होना, पैरों में दर्द होना , थकान लगना , शरीरमें सूजन (swelling or bloating), स्तन में दर्द का अनुभव होना, उल्टियाँ आना , मुँहासे निकलना – ऐसे काफी शारीरिक बदलाव देखे और औरतों द्वारा महसूस किये जाते हैं।

पीरियड्स के दौरान शरीर में होते दर्द और तकलीफ़ से बचने या उसे कम करने के लिए आपको निम्नलिखित आदतों और खाद्य उत्पादों से दूर रहना चाहिए –

  1. ठीक से सोना

हमारे शरीर के  लिए प्रतिदिन पर्यांप्त समय के लिए सोना,आराम करना अति आवश्यक है। मानव शरीर को तदुरूस्त रहने के लिए  हर रोज़ ६ – ७ घंटे की नींद मिलना ज़रूरी हैं। सोते वक़्त हमारा शरीर सेल्फ रिपेयर , संरक्षण के प्रक्रिया में लग जाता हैं , जिससे शरीर का हर अंग, हर प्रणाली को आराम मिलता है और रीसेट किया जाता है। नींद के दौरान, शरीर में सेरोटोनिन (Serotonin) नामक एक हार्मोन उन्मुक्त होता है। जब आप कम सोते हैं, तो सेरोटोनिन का स्राव भी कम होता है। कम सेरोटोनिन का प्रवाह दर्द के प्रति आपकी संवेदनशीलता को बढ़ाता है। तो अब आप जानते हैं, कि यदि आप नियमित रूप से पर्याप्त नींद लेते हैं तो मासिक के वक़्त होने वाली तकलीफ़ और भी बढ़ सकती हैँ।

2. चाय, कॉफ़ी या कोल्ड ड्रिंक्स (aerated drinks) का सेवन

चाहें आप चाय के शौक़ीन हो या कॉफ़ी के – लेकिन पीरियड्स के दौरान अपने पसंदीदा कैफीनयुक्त पेय (Caffeinated drinks) से थोड़ा दूर रहने की हम सलाह देतें हैं। कैफीन एक मूत्रवर्धक या एक “वासोकोन्स्ट्रिक्टर” (vasoconstrictor) है जिसका मूल अर्थ है कि यह हमारे शरीर में रक्त वाहिकाओं को मजबूत करता है और एक तरह से हमारे गर्भाशय में रक्त वाहिकाओं को कसता है जो आपके पीरियड्स के दर्द को बढ़ाने की वजह हो सकता है। यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं जो चाय या कॉफ़ी को पीरियड्स के वक़्त भी पूरी तरह पीना बंध नहीं कर सकते – तो आपको चाय / कॉफ़ी के सेवन की मात्रा में कटौती करने के बारे में ज़रूर सोचना चाहिए।

3. नमकीन और मीठे खाद्य पदार्थ

हमारे अधिकांश चहिते भोजन यानी की comfort food जैसे की – चॉकलेट, पेस्ट्री या डेसर्ट, चिप्स, नमकीन, फ्राइज़, भुजिया, तला हुआ खाना, दूसरे रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ इत्यादि में नमक या चीनी की अधिक मात्रा होती है। नमक में सोडियम (sodium) होता है जो जल प्रतिधारण (water retention) का कारण बनता है जो शरीर की सूजन (swelling/bloating) को बढ़ाता हैँ। दूसरी ओर, चीनी को भी शरीर की सूजन बढ़ने का  कारण माना जाता है। पीरियड्स के दिनों में शरीर के ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव होते है जिससे आप अपने शुगर के सेवन को बहुत अधिक या बहुत कम नहीं कर सकते हैं। जंक और प्रोसेस्ड फूड, रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ के ज़रिए चीनी का सेवन करने की तुलना में फलों या सूखे मेवों से प्राकृतिक शक्कर का सेवन उचित होता है। अगली बार, आप वेफर या चॉकलेट के पैकेट पर पोषण संबंधी सामग्री की जानकारी पढ़ सकते हैं और फिर निर्णय ले ये खाना आपकी सेहत के लिए और पीरियड्स के दौरान होते दर्द के लिए उचित आहार है या नहीं।

4. स्ट्रेस – मानसिक तनाव

तनाव इंसान के लिए एक मूक हत्यारा है और लंबे समय में स्वास्थ्य में बाधा डालने वाली कई बीमारियों का कारण भी है। तनाव उत्पन्न करते हार्मोन शारीरिक असंतुलन का कारण बन सकते है जो आपके पीरियड्स की नियमितता को भी बिगाड़ सकता है। इसलिए, अपने तनाव संबंधी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करें,आराम से काम ले और अपनी पसंदीदा प्रवृतिओं के लिए समय निकालें। तनाव से मुक्ति हमारे समूर्ण स्वस्थ्य के लिए अति आवश्यक हैं।

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5. बहुत अधिक या कम शारीरिक गतिविधि / व्यायाम करना

हालांकि, दिन के अधिकांश समय बिस्तर पर पड़े रहना और नियमित काम की चिंता किए बिना पीरियड्स के दौरान आराम करना और “टू-डू लिस्ट” की परवाह ना करना बहुत अच्छा लग सकता है, परंतु अगर पीरियड्स के वक़्त स्वस्थ रहना है तो ये सही विचार नहीं हैं। अब आप सोचेंगी की क्यों ? क्या पुरे दिन आराम करना बुरी बात हैं क्या ? शरीर के लिए जितना जरूरी आराम है, उतना ही ज़रूरी शारीरिक हलचल और गतिविधि है। व्यायाम करने से ऐसे हॉर्मोन्स उन्मुक्त होते है जो शरीर में रक्त परिसंचरण बढ़ाते है जो पीरियड्स के दर्द को कम करता है। आपको जिम बीस्ट या फुल-ऑन रनर नहीं बनना है, लेकिन हल्के कार्डियो व्यायाम जैसे की तेज चलना, जॉगिंग करना या फिर योग, पिलाटेस, प्राणायाम का अभ्यास करने से पीरियड्स के दर्द से राहत मिलने में मदद मिलती हैं।

6. प्रोसेस्ड और रेडी -टु -इट खाद्य पदार्थ का सेवन

प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड्स में रिफाइंड आटा (जिसे हिंदी में मैदा भी कहा जाता है) और हाइड्रोजनीकृत तेल (hydrogenated oils), संरक्षक रासायनीक पदार्थ (chemical preservatives), सोडियम की उच्च मात्रा होती है। ये खाद्य पदार्थ बेकार की अधिक कैलोरी और चर्बी का कारण होती है। रिफाइंड आटे (मैदे ) का थायराइड फंक्शन पर भी बुरा असर पड़ता है, इसलिए अगर आपको थायराइड की समस्या है तो आपको जंक फूड और मैदे के सेवन पर निश्चित रूप से विचार करना चाहिए।

7. धूम्रपान और शराब का अधिक सेवन

यह कपि नयी बात नहीं होगी अगर आपको बताए की धूम्रपान आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, चाहें आप महिला है या पुरुष ये आदत आपको फेफड़े या मुंह के कैंसर जैसी विकृतियों की ओर धकेल सकती है।

लगातार धूम्रपान की आदत जिन महिलाओं को होती है उन्हें सर्वाइकल कैंसर (cervica; cancer) या वलवर कैंसर (vulvar cancer) जैसे कैंसर होने की आशंका अधिक होती है। धूम्रपान पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को बढ़ाता है। आप एक दिन में जितनी सिगरेट पीते हैं, वह उतना ही आपकी सेहत के लिए बुरा साबित हो सकता है। यदि धूम्रपान छोड़ना कठिन है या आपको असंभव लगता है, तो प्रति दिन सिगरेट की संख्या में कटौती करना निश्चित रूप से आपके स्वास्थ्य सबंधी निर्णयों में से एक होना चाहिए।

अत्याधिक शराब पीना – हम यहाँ 1 ग्लास कॉकटेल या वाइन या 1-2 पेग व्हिस्की के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। अत्याधिक शराब पीने से निर्जलीकरण (dehydration) और हैंगओवर होता है जो अगले दिन आपके मूड को खराब कर सकता है और आपके पीरियड्स  में होने वाले शरीर के दर्द , सूजन को भी बढ़ा सकता है।

मेनस्ट्रुअल क्रैम्प (पीरियड्स में होने वाले दर्द) के लिए जो इतने गंभीर और चरम हैं कि वे आपके नियमित जीवन को कठिन बना देतें हैं और आपके शरीर के लिए नियमित कार्य करना मुश्किल बनाते हैं – तो आपको एक स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से शारीरिक जांच करवानी चाहिए।  एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis), पॉलीप्स (Polyps), फाइब्रॉएड (Fibroid), पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिज़ीज़ (पीआईडी) (PID – Pelvic Inflammatory Disease) जैसे रोग हो सकते है जिसकी वजह से अत्याधिक या असहनीय दर्द हो सकता है पीरियड्स के वक़्त। बिना डॉक्टर की जाँच के किसी भी नतीज़े तक आना गलत होगा इसलिए अगर आपको हर बार से ज़्यादा दर्द या तकलीफ पीरियड्स के समय महसूस हो जो आपकी दिनचर्या को परेशान करे तो जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें और अपना उपचार आवश्यक रूप से करवाएं।

 

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